समलैंगिकता आखिर है क्या ? अगर यह दो मित्रों को एक साथ रहने कि
मान्यता है तो इसका वैधानिक मान्यता से क्या तात्पर्य है ? यदि यह मित्रता से अधिक
कुछ है तो यह अप्राकृतिक यौनाचार हुआ | अप्राकृतिक यौनाचार स्त्री व पुरुष के
संबंधो का अतिक्रमण करता है | यह स्वस्थ समाज के मापदंडो को भी प्रभावित करता है |
कल कोई व्याभिचारी यह कहे के यह शरीर मेरा है, मै इसका कुछ भी उपयोग
करूँ | तो क्या यह किसी दूसरे के अधिकारों को अतिक्रमण नहीं हुआ ? फिर समलैंगिकता
को वैधानिक मान्यता क्यों ?
एक विकृत व बीमार मानसिकता में भटके लोगो को सही रास्ता दिखाना हम सब
का कर्तव्य है | इसे मानवाधिकारों के हनन का मामला नहीं कहा जा सकता | अगर यह शंका
होती है कि पुलिस को किसी के भी बेडरूम में झांकने का अधिकार मिल जाएगा तो इस शंका
का समाधान जरुरी है |
यह कहन अभी गलत है कि हम 2013 में 1860 को दोहरा रहे है | फिर 1860 ही
अच्छा, जो सामाजिक इकाई को जोड़ने का काम करता है | जरुरी नहीं है कि हम पश्चिम का
अनुकरण करे | क्या हम भारतीय पश्चिम को सही रास्ता नहीं दिखा सकते ?
Yes,air much kahne ki jarurat nahi
ReplyDelete