आजकल टी.वी.चेनलों पर लव जिहाद पर बहुत चर्चाएँ चल रही हैं ,कोई इसे साम्प्रदायिकता की राजनीति बता रहा हैं तो कोई इसे प्रेम पर प्रतिबंध लगाना बता रहा हैं | समस्या को वास्तविक परिपेक्ष्य में कोई नही रखता | इसकी जमीनी हकीकत को समझने के लिए हमे भूतकाल का अवलोकन करना होगा |
जब शहंशाह अकबर ने जोधाबाई से विवाह किया तब मुस्लिम धर्म मतावलंबियों ने उन पर दबाब बनाया की जोधाबाई का धर्म परिवर्तन किया जाए , उस समय की परिस्थितियां ऐसी थी शहंशाह इस दबाब से बाहर निकल गए | शहंशाह का मूल संदेश रापुताना को मित्रता का असाहस कराना भी था | उसी शहंशाह ने अपने पुत्र के प्रेम के साथ क्या बर्ताव किया ये सभी जानते हैं |
आज भी क्या परिस्थितियां उसी प्रकार की हैं जब कोई हिन्दू- लड़का किसी मुस्लिम- लड़की से प्रेम विवाह करता हैं तो लडके का धर्म परिवर्तन आवश्यक हैं, जब कोई हिन्दू - लड़की किसी मुस्लिम - लडके से विवाह करें तो लड़की का धर्म परिवर्तन आवश्यक हैं, यानि दोनों परिस्थितियों में हिन्दू लडके -लड़की का ही धर्म परिवर्तन होता हैं | जो ऐसा नही करते उन पर किस-किस तरह के दबाब बनाए जाते हैं यह सभी को मालुम हैं | अधिकतर इन युगल दम्पति को दबाब के आगे झुकना ही पड़ता हैं, क्योंकि हर कोई शहंशाह नही होता | जो नही झुकता वह प्रताडना का शिकार भी होता हैं | यही लव जिहाद हैं | इस प्रताड़ना का शिकार हिन्दू लड़की को ज्यादा झेलना पड़ता हैं क्योंकि उनका सम्पर्क अपने परिवार से लगभग टूट जाता हैं | वह लगातार प्रताडित होती हैं क्योंकि उसकी वेदना को समझने वाला कोई नही |
क्या व्यवहार के इस धरातल को समझने व उनकी आवाज उठाने वाले साम्प्रदायिक राजनीति कर रहें हैं | अगर संकीर्ण सोच वालो की समझ में यही आता हैं , तो हिन्दुओ को भी आत्मरक्षार्थ अपनी बेटियों के हक में खड़ा होने का पुरा हक हैं |
''हिंदुत्व एक ऐसी भू-सांस्कृतिक अवधारणा है,जिसमें सभी के लिए आदर हैं,स्थान है और सह-अस्तित्व का भाव भी | इस सह-अस्तित्व -प्रधान सांस्कृतिक चेतना ने इसे अत्यंत उदार,सहिष्णु और लचीला भी बनाया |बात तब बिगड़ी ,जब विदेशी आक्रमणकारियों की संस्कृतियों ने इस अति सहिष्णु संस्कृति की उदारता का लाभ उठाकर इसकी जड़ें ही कटनी प्रारम्भ कर दी | हिंदुत्व की इस अति सहिष्णुता को इसकी कायरता माना गया तथा उसके जो मूल तत्व थे ,उन्हें नष्ट-भ्रष्ट करने की हर संभव चेष्टा की गई ;अभी भी इस हेतु तरह-तरह के षडयंत्र रचे जाते हैं | अति सहिष्णुता ने 'हिंदुत्व' अथार्त भारतीयता के समर्थक व अनुयायियों को उदासीन,नपुंसक और भाग्यवादी बना दिया | 'आत्मवत् ' का जो सर्वकल्याणकारी दर्शन है, उसका अर्थ यह नही था की संसार व व्यवहार के धरातल पर हम स्वयं के प्रति अपने कर्तव्य को भूल जाएँ और आत्मरक्षा के प्रति सतर्क ना रहें |'' सभार -पुस्तक -हिंदुत्व ,लेखक-नरेंद्र मोहन , वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष P.T.I
जब शहंशाह अकबर ने जोधाबाई से विवाह किया तब मुस्लिम धर्म मतावलंबियों ने उन पर दबाब बनाया की जोधाबाई का धर्म परिवर्तन किया जाए , उस समय की परिस्थितियां ऐसी थी शहंशाह इस दबाब से बाहर निकल गए | शहंशाह का मूल संदेश रापुताना को मित्रता का असाहस कराना भी था | उसी शहंशाह ने अपने पुत्र के प्रेम के साथ क्या बर्ताव किया ये सभी जानते हैं |
आज भी क्या परिस्थितियां उसी प्रकार की हैं जब कोई हिन्दू- लड़का किसी मुस्लिम- लड़की से प्रेम विवाह करता हैं तो लडके का धर्म परिवर्तन आवश्यक हैं, जब कोई हिन्दू - लड़की किसी मुस्लिम - लडके से विवाह करें तो लड़की का धर्म परिवर्तन आवश्यक हैं, यानि दोनों परिस्थितियों में हिन्दू लडके -लड़की का ही धर्म परिवर्तन होता हैं | जो ऐसा नही करते उन पर किस-किस तरह के दबाब बनाए जाते हैं यह सभी को मालुम हैं | अधिकतर इन युगल दम्पति को दबाब के आगे झुकना ही पड़ता हैं, क्योंकि हर कोई शहंशाह नही होता | जो नही झुकता वह प्रताडना का शिकार भी होता हैं | यही लव जिहाद हैं | इस प्रताड़ना का शिकार हिन्दू लड़की को ज्यादा झेलना पड़ता हैं क्योंकि उनका सम्पर्क अपने परिवार से लगभग टूट जाता हैं | वह लगातार प्रताडित होती हैं क्योंकि उसकी वेदना को समझने वाला कोई नही |
क्या व्यवहार के इस धरातल को समझने व उनकी आवाज उठाने वाले साम्प्रदायिक राजनीति कर रहें हैं | अगर संकीर्ण सोच वालो की समझ में यही आता हैं , तो हिन्दुओ को भी आत्मरक्षार्थ अपनी बेटियों के हक में खड़ा होने का पुरा हक हैं |
''हिंदुत्व एक ऐसी भू-सांस्कृतिक अवधारणा है,जिसमें सभी के लिए आदर हैं,स्थान है और सह-अस्तित्व का भाव भी | इस सह-अस्तित्व -प्रधान सांस्कृतिक चेतना ने इसे अत्यंत उदार,सहिष्णु और लचीला भी बनाया |बात तब बिगड़ी ,जब विदेशी आक्रमणकारियों की संस्कृतियों ने इस अति सहिष्णु संस्कृति की उदारता का लाभ उठाकर इसकी जड़ें ही कटनी प्रारम्भ कर दी | हिंदुत्व की इस अति सहिष्णुता को इसकी कायरता माना गया तथा उसके जो मूल तत्व थे ,उन्हें नष्ट-भ्रष्ट करने की हर संभव चेष्टा की गई ;अभी भी इस हेतु तरह-तरह के षडयंत्र रचे जाते हैं | अति सहिष्णुता ने 'हिंदुत्व' अथार्त भारतीयता के समर्थक व अनुयायियों को उदासीन,नपुंसक और भाग्यवादी बना दिया | 'आत्मवत् ' का जो सर्वकल्याणकारी दर्शन है, उसका अर्थ यह नही था की संसार व व्यवहार के धरातल पर हम स्वयं के प्रति अपने कर्तव्य को भूल जाएँ और आत्मरक्षा के प्रति सतर्क ना रहें |'' सभार -पुस्तक -हिंदुत्व ,लेखक-नरेंद्र मोहन , वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष P.T.I
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