Friday, 2 May 2014

“ नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन ”

पश्चिमीदेशीय लोगों ! तुम्हारी जो इच्छा हों कह डालो – अभी यह तुम लोगों का समय है | आओ बच्चो ! जो कुछ बकना हों, बक डालो | हमने यथेष्ट अभिज्ञता प्राप्त कर ली है और इसलिए हम चुप है | आज तुम लोगों के पास धन है, और इसलिए तुम लोग हमारी ओर तिरिस्कार की दृष्टि से देखते हों | अच्छा, यह तुम्हारा समय है, बच्चो ! जितना बकना हों, बक लो – यही हिन्दुओ का मनोभाव है |


~ स्वामी विवेकानंद  


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