आज पुरे देश की आशाएँ व आकंक्षाऐ नयी सरकार व नये प्रधनमन्त्री से
जुडी हुई है | नये जनादेश में सम्पूर्ण भारत के दर्शन होते है | इसका एक अर्थ यह
भी निकलता है,प्रधानमंत्री किसी एक वर्ग विशेष का प्रतिनिधित्व नही करते | वह सभी
जाति ,समुदायों,अगडो-पिछडो और समाजिक असमानता में जी रही आम-जनता का प्रतिनिधित्व
करते है | नयी सरकार को बड़ा बहुमत मिला हैं ,उतना ही बड़ा आकार जनता की उम्मीदों का
भी हैं | सभी को विकास चाहिए और निश्चित तौर पर यह सरकार की जिम्मेदारी हैं |
नयी सरकार के लिए सबके बीच संतुलित तालमेल रख कर सबका विकास करना
परमावश्यक है | यह कैसे संभव होगा ,यह प्रश्न सबके सम्मुख खड़ा हैं ? साथ ही प्रश्न
यह भी हैं ,क्या राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ बोध की जिम्मेदारी केवल
प्रधानमंत्री पर ही है ? आईए विमर्श साँझा करे |
प्रधानमंत्री जी ने देश की सवासौ करोड जनता की बात की हैं | जिसे हम
रोड –मेप कहते है, वह तो बिलकुल तैयार है | प्रथम आवश्यकता है संवाद –वह भी सीधा |
फिर प्रश्न उठा किससे और कैसे ,और उसका विषय क्या रहें ? ऊतर स्पष्ट है,सभी से और
उसका आकार व विषय भी जनादेश में स्पष्ट है | संवाद स्पष्ट है,’’जो आज जहाँ हैं वह वहाँ
रहकर अपना कार्य पूरी निष्ठापूर्वक करे ‘’ |यह सुत्र बड़ा काम कर सकता हैं | इसमें
किसी को समस्या नही होनी चाहिए परन्तु यह समाधन बहुत-सी समस्याओं का कर सकता हैं |
इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनकी होगी जो आज शीर्ष पर बैठे हैं | सरकार का काम हो
उन अवसरों को सुनिश्चित करना जो सभीको और सबके लिए उपलब्ध हो | सरकार ईमानदारी से
काम करने वालो व ईमानदार लोगों को आगे लाने में प्रतिबद्ध रहें | इसका यह अर्थ कतई
नही हो की सरकार किसी की ईमानदारी पर शक करे |
हमे रटी-रटाई परिपाटियों से बहार निकलना होगा | न ही कोरा
समाजवाद न ही कोरा पूंजीवाद इसके बीच का रास्ता चाहिए | जिसे नाम दे सकते हैं
‘नव-प्रक्रियावाद ‘ | समाजवाद को पूंजीवाद के दबाब से व पूंजीवाद को समाजवाद के
दबाब से मुक्त करना होगा | सरकार केवल सरकार बनकर कार्य करे तो इस कठिन लक्ष्य को
भी पाया जा सकता हैं | सरकार की द्रष्टि भक्ति,ज्ञान और वैराग्य की रहनी चाहिए |
वरना चाहे हम कितना भी दिखावा करे चाहे हम किसी भी भाषा का प्रयोग कर अपने को
गुमराह करें, जब तक सादगी व सबकी भलाई का लक्ष्य निहित नही होगा तब तक हमारी सफलता
संदिग्ध ही रहेगी | नेति नेति
No comments:
Post a Comment