Tuesday, 4 March 2014

जात ना पूछो साधू की, पूछलिजो ग्यान्

जात ना पूछो साधू की, पूछलिजो ग्यान्
मोल करो तलवार का , पड़ा रहने दो म्यान्.....संत कबीर वाणी
परन्तु भाई हमारे तथाकथित जाति-वादी ,सम्प्रदायवादी ठेकेदार तो, ‘जात ही पूछो साधू की ‘ वाली नीति ही अपनाएगे ;क्योंकि इसी-मे इनका फायदा हैं |भाङ में जाए समाजिक-न्याय, भाङ में जाए गरीब –गुरबा,इनकी राजनीतिक दुकान मजे से चल रही थी |पता नही ये मोदी नाम का दलित कहा से आ गया |अब तक तो हम इसे अलग प्रकार का जीव समझ रहे थे; न तो हमे इसके ज्ञान से मतलब न इसके काम से |जब -तक यह रास्ट्रीयता की बात करता था तब तक तो कोई चुनोती थी ही नही |क्योंकि हमनें वैमन्स्यता के बीज बड़े गहरे बो रखे हैं | परन्तु यह तो हमे हमारी भाषा में चुनोती दे रहा है |अब तो इसकी जात पूछनी ही पडेगी आखिर बताएगा क्या ?हम ठहरे इस खेल के पुराने खिलाडी; अकेला अभिमन्यु हम महारथियों के बीच क्या कर लेगा |

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