आजकल कांग्रेस पार्टी के युवराज अपनी जनसभाओ में कहते सुने जा रहे है के भाइयो ' कॉरपोरेट सरकार चाहिए या आम आदमी की सरकार ' | उनके भाषणों को सुनकर क्या यह जनमानस मान ले के आजकल आप समाजवादी हो गए है या फिर कम्युनिस्ट चिन्तक ?
अरे साहब मनमोहन जी से तो पूछ लीजिए की उन्होंने FDI लाने के लिए देश के दरवाजे खोलने में कितना उतावलापन दिखाया | क्या वह पूंजीवाद को, वो भी विदेशी पूंजी के लिए संरक्षण व आत्मसमर्पण है ?
कांग्रेस के लिए विडंबना यह है, के आज भारतीय कॉरपोरेट जगत का विश्वास इस सरकार से उठ गया है | आर्थिक उदारवाद के इस दौर में यह स्थिति देश के लिए कितनी खतरनाक हो चुकी है, ये सभी अर्थशास्त्री अच्छी तरह से जानते है | अब कांग्रेस की समस्या दोहरी है | वह न तो आम आदमी का विश्वास जीत सकी और न ही उद्योगपतियों का |
अब श्रीमान जी कॉरपोरेट जगत कि भर्त्सना करने से आप पापमुक्त तो हो नहीं जायेंगे | जब आप 10 वर्षों के शासनकाल में संस्थागत व ढाँचागत विकास के लिए कोई नीति बनाकर लागू न कर पाए तो दोष आपकी स्वयं कांग्रेस सरकार का है | सच तो यह है के आप न तो समाजवादी, न उदारवादी और न मार्क्सवादी बन पाए | केवल व्यर्थवादी बनकर रह गए |
" एक ही विकल्प........एकात्म मानववाद "

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