Monday, 18 November 2013

व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम मौलिक स्वतंत्रता

कोबरा पोस्ट ने एक खुलासा किया | जिसमे उसने व्यक्तिगत स्वतंत्रता कि जो चीर-फाड़ की है, वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का बड़ा मामला बन गया है | मीडिया स्वयंभू निर्णायक बनता है और फिर वहीँ उसकी धज्जियाँ उड़ाता है |एक बड़ी पार्टी एक बड़े नेता को घेरने के लिए तुरतं उस मामले को लपक लेती है और मीडिया ही उसपर पुरे दिन हो-हल्ला मचाती है |

इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग के एक मामले में यह निर्देश दिया था के ऑनर किलिंग से पहले परिवार अपने बच्चो को संभाले | क्या यह भी एक ऐसा मामला नहीं है, जब एक पिता गुप्त रूप से अपने बच्चो पर नज़र रखने के लिए प्रशासन से सहयोग प्राप्त करता है और प्रशासन पिता को गोपनीयता का आश्वासन देकर उसकी मदद करता है | वाक्या चाहे जो भी रहा हो, जिसका शायद किसी को पता नहीं तो क्या उस परिवार कि गोपनीयता खंडित की जानी चाहिए ? कोबरा पोस्ट ने मामले की गोपनीयता को खंडित कर उस परिवार की मर्यादा को सार्वजनिक किया है | जोकि मेरे दृष्टिकोण में एक गंभीर अपराध है | क्या एक पिता का अपने परिवार पर कोई अधिकार नहीं है ? और देश की एक बड़ी पार्टी के लिए यह मामला राजनैतिक दुरूपयोग का विषय बन गया है |

मै कोई बड़ा विद्वान तो नहीं परन्तु इतना अवश्य महसूस कर रहा हूँ इस मामले पर देश में राजनीती करना अनावश्यक है | क्या मीडिया का किसी ने निजी जीवन पर इस तरह का खुलासा करना उचित है जैसा कोबरा पोस्ट ने किया है ?



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