Friday, 4 July 2014

क्या आप अपने नेता में इन गुणों को देखते हैं ?

हमारे यहाँ भजनों में गाया जाता हैं-
काम, क्रोध, मद, लोभ ,मोह गये छुटी जगत की आस |
उसमें तो कछु अन्तर नहीं भगत कहो चाहे भगवान |
जिन्होंने मन मर लिया जी हम तो उन सन्तन के हो दास जिन्होंने मन मर लिया |

क्या आप अपने नेता में इन गुणों को देखते हैं ? ऐसे ही नेता शीर्ष नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं | नेता जी को भी चाहिए के वह संतो के बताए मार्ग को अपनाए |
आजादी का समय परिवर्तन काल का समय था | परिवर्तन नये मूल्यों की संरचना का भी समय होता हैं | क्या आज कुछ उसी प्रकार के परिवर्तन का समय हैं ?

हमे सर्वोत्तम अवसर की पह्चान कर लेनी चाहिए | लोकतन्त्र के सभी स्तम्भ मिलकर इस कार्य को सफलतापूर्वक कर सकते हैं | आचार्य चाणक्य ने भी निजी व सावर्जनिक जीवन में इन्ही विचारों पर चलने की सलाह दी थी |

Wednesday, 11 June 2014

’देश हमे देता सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे ' |

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने संसद में एक बार फिर देश की सवासौ करोड जनता का आह्वान किया आप एक कदम आगे बड़ाए देश सवासौ करोड कदम आगे बड जाएगा | सबका साथ सबका विकास | या यह कहना विकास को जनआंदोलन में बदलना होगा | यह बात तो स्पष्ट है प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं | देश के लिए कुछ करना चाहते है | हमारे नये प्रधानमंत्री अत्याधिक ऊर्जावान हैं वह देश के जनमानस में नयी उर्जा भर देना चाहते हैं | वह सच्चे मन से बार-बार पुकार रहे हैं कदम आगे तो बड़ाईए ,फिर देखना देश की तस्वीर किस प्रकार बदलती है | वह बार-बार विश्वास दिला रहे है में हर जगह आपके साथ खड़ा मिलुगा | प्रधानमंत्री यही तो चाहते हैं ’’जिसे जो काम मिला हैं वह उस काम को पूरी निष्ठा ईमानदारी से करें ‘’| क्या हम इसके लिए तैयार हैं ?

देश में फैली अव्यवस्था को व्यवस्था में बदलने में कुछ समय तो लगेगा | आज हर कोई नयी सरकार से कुछ ना कुछ मांग कर रहा है , कोई भी कुछ समय रुकने को तैयार नही | वर्तमान परिस्थीती यह हैं , हम प्रधानमंत्री जी की तरफ देख रहे हैं और प्रधानमंत्री जी हमारी तरफ | अगर प्रधानमंत्री जी एक कदम चलते हैं तो हमे भी तो सवासौ करोड कदम आगे बढा देने चाहिए | प्रधानमंत्री जी यही तो आह्वान् कर रहें हैं आप जो भी कार्य कर रहें हैं उसमें केवल इतना भाव ले आईए , में जो भी कार्य कर रहा हूँ वह देश के लिए कर रहा हूँ | ’देश हमे देता सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखेकेवल यही मंत्र सार्थक करना है |

कुछ लोग इस सीधे-साधे आह्वान् की भी बाल की खाल निकालने में लगे हैं ऐसा हमारे ही देश में क्यों होता हैं ?