हमारे यहाँ भजनों में गाया जाता हैं-
काम, क्रोध, मद, लोभ ,मोह गये छुटी जगत की आस |
उसमें तो कछु अन्तर नहीं भगत कहो चाहे भगवान |
जिन्होंने मन मर लिया जी हम तो उन सन्तन के हो दास जिन्होंने मन मर लिया |
क्या आप अपने नेता में इन गुणों को देखते हैं ? ऐसे ही नेता शीर्ष नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं | नेता जी को भी चाहिए के वह संतो के बताए मार्ग को अपनाए |
आजादी का समय परिवर्तन काल का समय था | परिवर्तन नये मूल्यों की संरचना का भी समय होता हैं | क्या आज कुछ उसी प्रकार के परिवर्तन का समय हैं ?
काम, क्रोध, मद, लोभ ,मोह गये छुटी जगत की आस |
उसमें तो कछु अन्तर नहीं भगत कहो चाहे भगवान |
जिन्होंने मन मर लिया जी हम तो उन सन्तन के हो दास जिन्होंने मन मर लिया |
क्या आप अपने नेता में इन गुणों को देखते हैं ? ऐसे ही नेता शीर्ष नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं | नेता जी को भी चाहिए के वह संतो के बताए मार्ग को अपनाए |
आजादी का समय परिवर्तन काल का समय था | परिवर्तन नये मूल्यों की संरचना का भी समय होता हैं | क्या आज कुछ उसी प्रकार के परिवर्तन का समय हैं ?